सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Ravish Kumar लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पत्रकार रवीश कुमार की मां का निधन, लंबे समय से चल रही थीं बीमार ,आज पैतृक गांव लाया जाएगा अंतिम संस्कार के लिए

 रवीश कुमार इन दिनों विदेश में हैं। मां के निधन का समाचार सुनकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर की है। रेमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की मां यशोदा पाण्डेय का मंगलवार को निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं। रवीश कुमार की मां के निधन का समाचार फैलते ही तमाम लोग उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक ट्वीट कर रवीश कुमार की मां के निधन पर शोक जताया है।   अपने ट्वीट में नीतीश कुमार ने लिखा है, ‘वरिष्ठ पत्रकार श्री रवीश कुमार जी की माता जी यशोदा पाण्डेय जी का निधन दुःखद। वे एक सामाजिक और धर्मपरायण महिला थीं। दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है। बता दें कि मूल रूप से मोतिहारी के जितवारपुर गांव के (बिहार) के रहने वाले रवीश कुमार इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। कल ही उन्होंने यूट्यूब पर एक वीडियो डाली थी, जिसमें बताया था कि वह बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में हैं।   वहीं, मां के निधन का समाचार सुनने के बाद रवीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है -" माँ...

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की माँ नहीं रही !

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की माँ का आज निधन हो गया!  पत्रकार रवीश कुमार ने इस पर अफसोस जताते हुए निशब्द हो गए। रवीश कुमार अभी देश से बाहर हैं और ऐसे वो खुद को असहाय महसूस करते हुए लिखते हैं -    माँ  सोचा था ब्रसल्स को अपने लिए नहीं, अपने दर्शकों के लिए देखूंगा। यहां आते ही सब कुछ कैमरे के पीछे से देखने लगा। ज़हन में मां बनी रही कि वेंटिलेटर पर नहीं होती तो वही ज़्यादा खुश रहती, भले ही ब्रसल्स बोलना उसके लिए भारी हो जाता। इस सूचना को लेकर अपने साथ जीना पहाड़ ढोने के समान लग रहा है। यहां की इमारतों से न तो इतिहास का रिश्ता बना पा रहा हूं, न वर्तमान का। देख रहा हूं मगर कुछ नहीं दिख रहा है। चल रहा हूं लेकिन पता नहीं कितनी दूर चल गया और लौट कर आ गया। इस वक्त लिख रहा हूं ताकि खुद के साथ रह सकूं। मेरे लिए जीना लिखना है और लिखते-लिखते उसकी हंसी बार-बार लौट कर आ रही है। उसके लिए यहां की तस्वीर कितनी ख़ास होती, मगर अब उसी के कारण सब कुछ उजाड़ लग रहा है।  दिन के वक्त यहां पांव रखने की जगह नहीं होती है। सुबह-सुबह इसके खाली अहाते को देखना उस रि...

रवीश कुमार ने इस्तीफ़ा देने के बाद इस फ़ाउंडेशन को क्यों कहा शुक्रिया ?

    छाया प्रकाश फ़ाउंडेशन का शुक्रिया। आपकी वजह से सोलापुर के शानदार लोगों से मिलने का मौक़ा मिला। मंच पर साथ में गणेश देवी खड़े हों तो जीवन ऐसे ही धन्य हो जाता है। मुंबई और दिल्ली की जगह सोलापुर में जस्टिस ए पी शाह और ओडिशी की नृत्यांगना झेलम ताई से मिलना दिव्य रहा। झेलम ताई मुंबई में स्मितालय चलाती हैं। स्मिता पाटिल की याद में नृत्य का प्रशिक्षण देती हैं।    Image source - Ravish Kumar  इस छोटी सी जानकारी ने मेरे भीतर कितना कुछ पलट दिया। स्मिता पाटिल बेहतरीन अभिनेत्री तो थी हीं, उनके जाने के इतने साल बाद उनकी सामाजिक भूमिका के बारे में सुनकर लगा कि स्मिता फ़िल्मों से ज़्यादा समाज में ज़िंदा हैं। आज भी वो याद की जाती हैं। इसका यही मतलब है कि जब जीवित होंगी तो फ़िल्मों के अलावा सामाजिक राजनीतिक कामों में कितना व्यस्त रही होंगी। सोलापुर में सलाउद्दीन साहब से मुलाक़ात हुई जो पंद्रह वर्षों से एन डी टी वी से जुड़े रहे। यहाँ जो भी मिला प्यार से मिला।सोलापुर की चादरें काफ़ी लोकप्रिय हैं। मुझे    इतनी चादरें मिली हैं कि चादर-चादर हो गया हूँ। एक नया बैग ...

सुबह-सुबह मेरे घर छापा पड़ा - रवीश कुमार

 मेरे घर छापा पड़ा सुबह-सुबह मेरे घर छापा पड़ा  पेंशन संबंधी काग़जात गाढ़े वक़्त और बच्चों के भविष्य के लिए सावधि-जमा पाँच-पाँच लाख के दो खातों के सिवा क्या था मेरे पास फिर भी कार्रवाई चली पूरा दिन सारी रात   बाक़ायदा एक चार्जशीट तैयार की गई मेरे ख़िलाफ़ निम्न बिंदुवार- कि मेरी जेब में मिले पाँच-पाँच सौ के नोट पूरे तीस हजार  जबकि मेरी मासिक पेंशन है कुल पच्चीस हजार  कि बॉयकॉट के बावजूद मेरी जेब में पाया गया फ़िल्म लालसिंह चड्डा के शो का आधा टिकिट जबकि मनोरंजन-कर से मुक्त मैंने देखी नहीं कश्मीर फाइल्स कि मेरी क़िताबों की शेल्फ से बरामद हुआ आपत्तिजनक साहित्य इक़बाल, फ़ैज़, मंटों,भगतसिंह की क़िताबें  गाँधी की जीवनी भारत एक खोज जबकि राष्ट्रनिर्माता वीर सावरकर दीनदयाल उपाध्याय कुशाभाऊ ठाकरे की नहीं मिली एक भी क़िताब कि शीर्ष पर रखा था सूर मीरा नंदराय का कवित्त गीता-रामायण के साथ मगर इनमें शामिल है मुस्लिम कवि रहीम रसखान अमीर ख़ुसरो का साहित्य  कि राम को लेकर मेरी सोच इसलिए संदिग्ध मानी गई  कि राममंदिर निर्माण हेतु मैंने चंदे की रसीद नहीं कटाई मैं गिरफ़्तार मेरे पास त...

अडानी ग्रुप ने NDTV का 29.18% शेयर खरीदा। चैनल में अब बड़ा दखल होगा

      Image source-google    अदाणी ग्रुप NDTV (New Delhi Television) मीडिया ग्रुप में 29.18% की हिस्सेदारी खरीदेगा। अदाणी ग्रुप की मीडिया कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स लिमिटेड इनडायरेक्ट तरीके से एनडीटीवी में 29.18 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदेगा।    Adani-NDTV: यह अधिग्रहण AMNL (AMG Media Networks Limited) की पूर्ण सहयोगी इकाई विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) के द्वारा किया जाना है। AMNL पर अदाणी ग्रुप का मालिकाना हक है। आपको बता दें कि एनडीटीवी की मीडिया जगत में खास पहचान है। देश के प्रमुख मीडिया हाउस में से एक एनडीटीवी की बड़ी हिस्सेदारी अब अडानी समूह के हाथों में होगी। एनडीटीवी की तीन नेशनल न्यूज चैनल- एनडीटीवी 24x7, एनडीटीवी इंडिया और एनडीटीवी प्रॉफिट हैं। इसके अलावा डिजिटल न्यूज में भी चैनल की खासी पकड़ है। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर चैनल के फॉलोअर्स की संख्या मिलियंस में है।   अडानी ग्रुप ने ₹495 करोड़ रुपए खर्च अडानी समूह ने प्रेस रिलीज जारी कर इस डील के बारे में जानकारी दी है। गौतम अडानी समूह की कंपनी एएमजी मीडिया नेट...

अफसोस! क्या चोर- दलाल ही प्रतिष्ठित होते रहेंगे? रवीश कुमार ने क्यों कह दी ऐसी बात... जानिए

                 Image source-google  रवीश कुमार आए दिन अपने आस पास हो रहे घटनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण राय सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्त करते रहते हैं। लेकिन इस बार उन्हें एक बात ने ऐसा विचलित कर दिया कि उन्होंने गुस्से में कहा इस समाज में क्या चोर- दलाल ही प्रतिष्ठित होते रहेंगे? आइए जानते हैं कि आखिर पूरा वाक्या है क्या? 17 जुलाई को मेडिकल की NEET प्रवेश परीक्षा हुई थी। CBI ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग कथित रुप से उम्मीदवारों को पास कराने में मदद कर रहे थे।    समाज की नैतिकता कहां पहुंच गई है। चोरी से लोग डॉक्टर बनना चाहते हैं और पैसे लेकर लोग चोरी कराने के लिए तैयार हैं। हर परीक्षा में चोरी वाला नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। इसे किसी चीज़ का डर भय नहीं है। किसी छात्र के हक की हत्या कर चोरी और पैसे से उसकी सीट हड़प लेना चाहते हैं। क्या इनका ईमान नहीं डोलता होगा? न जाने कितने ही उम्मीदवार चोरी से डाक्टर बन भी गए होंगे। इस समाज में क्या चोर- दलाल ही प्रतिष्ठित होते रहेंगे? तभी यह समाज झूठ का विरोध नहीं करता।  ...

जब प्रधानमन्त्री मोदी बोले - 'सर्वेंट क्लास' वाली शिक्षण पद्धति में बदलाव लाएँ, फिर रवीश कुमार ने ऐसे लगा दी क्लास?

इस पर बहस होनी चाहिए कि सर्वेंट क्लास क्या है? क्या कोई ऐसा सिस्टम है जिसमें सर्वेंट क्लास नहीं होता है?  बिज़नेस क्लास भी तो अनगिनत प्रकार के स्थायी और अस्थायी सर्वेंट क्लास पर टिका होता है। क्या वहाँ यह क्लास नहीं होता? सरकारी सर्वेंट क्लास और बिज़नेस सर्वेंट क्लास में क्या अंतर है?  क्या प्रधानमंत्री यह कहना चाहते हैं कि युवा सरकारी सर्वेंट क्लास की तरफ़ न देखें ? तो यह बात साफ़ साफ़ कर दें कि नौकरी नहीं देंगे। वोट तो तब भी मिलेगा लेकिन बात तो ऐसी हो जिससे लगे कि कवि क्या कहना चाहते हैं? दस लाख नौकरियाँ देने का एलान क्या है ? स्किल इंडिया के ज़रिए ठेके पर काम करने वालों की फ़ौज तैयार की जा रही है, उसे किस प्रकार के सर्वेंट क्लास में रखा जाएगा?   अभी तक जो शिक्षा प्रणाली रही है, उसमें समस्याएँ तो हैं,  उसके बारे में प्रधानमंत्री पहली बार नहीं बोल रहे। कई बार कई प्रधानमंत्री बोल चुके हैं। हमारे शिक्षाविद बोल चुके हैं। शिक्षा प्रणाली बदलती भी रही है फिर भी उसमें एक क़िस्म की जड़ता तो रही ही है लेकिन क्या पूरी प्रणाली को एक डंडे से हाँका जा सकता है जैसे सिस्टम बेमक़...

जीं न्यूज़ को आय सपोर्ट रोहित हैशटैग चलाना था तब पुलिस में शिकायत क्यों की?

  जीं न्यूज़ को आय सपोर्ट रोहित हैशटैग चलाना था तब पुलिस में शिकायत क्यों की? ज़ी न्यूज़ के ऐंकर रोहित रंजन को ज़ी न्यूज़ की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया और ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। गौतमबुद्धनगर पुलिस के मीडिया सेल ने बताया है कि रोहित को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ के बाद साक्ष्यों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई। उनके ऊपर लगी धाराओं के जमानतीय अपराध होने के चलते उन्हे जमानत पर रिहा कर दिया गया है। सूचना में यह नहीं लिखा है कि किसकी शिकायत पर यह पूछताछ की गई है लेकिन अब यह बात जगज़ाहिर है कि ज़ी न्यूज़ ने ही नोएडा पुलिस से शिकायत की थी वह इस मामले में जांच करे और कानूनी कार्रवाई करे। क्या यह गिरफ़्तारी उसी शिकायत के आधार पर नहीं हुई है?   एक तरफ ज़ी न्यूज़ की शिकायत पर उसके ऐंकर को गिरफ्तार किया जाता है, दूसरी तरफ़ ज़ी न्यूज़ के DNA में हैशटैग चल रहा है, आय सपोर्ट रोहित रंजन।जब रोहित को सपोर्ट ही करना था,तब ज़ी न्यूज़ ने थाने में शिकायत क्यों कराई? ज़ी न्यूज़ ने पुलिस से जो शिकायत की है, उसमें रोहित रंजन का नाम नहीं है। सीनियर प्रोड्यूसर नरेंद्र सिंह और प्रशि...

हर सजग नागरिक को मिले जेल डेबिट कार्ड, सवाल करने से पहले कार्ड अनिवार्य हो- रवीश कुमार

                   रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सरकार से सख्त सवाल पूछते हैं। उनका मानना है कि सवाल सरकार से होती है, विपक्ष से नहीं। इस बार उन्होंने बिना किसी के नाम लिए माननीय से एक अपील की है ताकि जनता को राहत मिल सके। आईए जानते हैं रवीश कुमार ने क्या कहा है। हर सजग नागरिक को मिले जेल डेबिट कार्ड, सवाल करने से पहले कार्ड अनिवार्य हो माननीय,भारतवर्ष में माननीय की कमी नहीं है,इसलिए स्पष्ट करना ज़रूरी नहीं है कि इस पत्र में माननीय कौन है। अपनी सुविधानुसार कोई भी माननीय मान सकता है कि यह पत्र उन्हें संबोधित है। आप अदालत भी हो सकते हैं, आप सरकार भी हो सकते हैं, आप आम नागरिक भी हो सकते हैं।    जिस तरह से आए दिन ट्विटर पर किसी को भी जेल भेजने केा अभियान चलाया जाता है और आगे चल कर उसे जेल भेज भी दिया जाता है, अब यह मुमकिन है कि ट्विटर पर कभी भी अभियान चलाकर किसी को भी जेल भेजा जा सकता है। पत्रकारिता के पेशे में जो भी पत्रकारिता कर रहा है, वह इस आशंका का शिकार है कि कभी भी जेल भेजा जा सकता है। उसे नहीं तो उ...

अमित शाह के पहले लालू यादव का ही चर्चित बयान रहा कि... रवीश कुमार का ब्लॉग

रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सरकार से सख्त सवाल पूछते हैं। उनका मानना है कि सवाल सरकार से होती है, विपक्ष से नहीं। इस बार उन्होंने अमित शाह और उनकी पार्टी को लेकर जो बातें कही है आईए जानते हैं, भाजपा का राज और अमित शाह का विश्वास। कोई नेता इतने आत्मविश्वास से नहीं बोल सकता कि भाजपा का राज 30-40 साल रहेगा। सितंबर 2018 में अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी पचास साल राज करेगी। 2024 तक दस साल हो ही गया। 2024 के बाद का पाँच साल मिला लें तो 15 साल हो जाता है। अमित शाह के पहले लालू यादव का ही चर्चित बयान रहा कि बीस साल राज करेंगे। बिहार और केंद्र मिलाकर इतना रहा भी।    अब इसके बाद भी हर चुनाव में लोग पूछते हैं कि क्या होगा तो इसका मतलब यही है कि उनके पास कोई और काम नहीं है। अगर इतनी बेरोज़गारी और महंगाई और ख़राब शिक्षा स्वास्थ्य के बाद भी कोई पचास साल राज करने का दावा करता हो और उसका क़रीब क़रीब आधा साबित कर देता हो तो फिर उनकी इस बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मैं भी मानता हूँ, जितने भी बेरोज़गार हैं या अग्निवीर से नाराज़ हैं, उनका बड़ा हिस्सा बीजेपी को ह...

सबके नाथ एकनाथ, समर्थक विधायकों का रपचिक डांस - रवीश कुमार

  रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं , लेकिन इस बार उन्होंने एकनाथ शिंदे के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने पर गाना गाते हुए जो लिखा उसे आप भी पढ़िए। सबके नाथ एकनाथ, समर्थक विधायकों का रपचिक डांस क़सम से शिंदे के विधायक डांस अच्छा करते हैं।क्या स्टेप्स मारेला है अपुन का भाई लोग बाप। रपचिक डांस का टाइम आएला है। महाराष्ट्र में डांस पोलिटिक्स छाएला है, बीड़ू। राजनीति पैसों का खेल है और ये फ़ाइव स्टार होटल है। राशन की दुकान नहीं, जहां प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत मुफ़्त अनाज और एक किलो तेल बंटने वाला है। पाँच सितारा हिन्दुत्व है।    इस पेज पर आने वाले पाठक जानते हैं कि मैं डांस का घोर समर्थक हूँ। हर किसी को डांस आना चाहिए।बीजेपी के विधायकों को भी डांस करना चाहिए। उनका दिमाग़ इसमें उलझा होगा कि मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक तो है लेकिन उन्हें क्यों स्ट्रोक लग गया? ऐसे में वे नोटबंदी याद करें। वो भी मास्टर स्ट्रोक था लेकिन उसका नतीजा क्या निकला, किसी को पता नहीं चला। ये शॉक थेरेपी है ताकि आप पुराना सब भूल जाएँ और अपने झटके को सँभालने में लग जाए जिस तरह से...

कन्हैयालाल की हत्या करने वाले आतंक फैलाने का काम किया है- रवीश कुमार

                                           Image source-google  उदयपुर के कन्हैयालाल की हत्या आतंकी कार्रवाई है। जघन्य और बर्बर है। ऐसा करने वाले आस्था के नाम पर आहत की आड़ ले रहे हैं। उन्हें ठीक से पता है कि इससे हिंसा भड़क सकती है। ऐसा कर वे समाज में सबके लिए घोर असुरक्षा पैदा कर रहे हैं। आस्था के नाम पर आहत को फुटबॉल का खेल मत बनाइये कि एक किक उधर से लगेगी तो एक इधर से। ऐसे लोग समाज को हैवानियत की आग में झोंकना चाहते हैं। इन्हें आस्था और मज़हब से कोई मतलब नहीं।  अच्छी तरह से पता होना चाहिए है कि ऐसे मुद्दों की एक सीमा होती है। बोलने लिखने के बाद इन्हें समाप्त मान लिया जाना चाहिए। अगर कोई इसे जान से मारने के स्तर पर ले जाता है तो निःसंदेह उसकी मंशा आहत के नाम पर समाज में आतंक पैदा करने की है। कन्हैया लाल के हत्यारे इस देश के विवेक और भाईचारे के हत्यारे हैं।   नूपुर शर्मा के बयान की निंदा हो चुकी है। सरकार ने निंदा की है और बीजेपी ने पद से हटा दिया है। ठीक है क...

कितना दुखद है। किस बात की इन्हें सज़ा दी जा रही है- Ravish Kumar | how sad | punishment

               Image credit-google रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो छात्रों के सवाल को अपने प्राइम टाइम शो में दिखाते और छात्रों के सवाल को लेकर सरकार सरकार से कड़े सवाल पूछते आए हैं; लेकिन इस बार उन्होंने यूनिवर्सिटी और उसके वजह से हो रहे बर्बाद छात्रों क्या लिखा है छात्रों ने रवीश कुमार को जवाब में रवीश कुमार ने लिखा, कितना दुखद है। किस बात की इन्हें सज़ा दी जा रही है। मुझे नहीं पता कि मगध यूनिवर्सिटी के छात्र अग्निवीर के बारे में क्या सोच रहे हैं और अग्निवीर के उम्मीदवार मगध यूनिवर्सिटी के बारे में क्या सोच रहे हैं ।  सर प्रणाम, मैं मगध विश्वविधालय का ग्रेजुएशन 2018-21 सत्र का छात्र हूँ। वैसे तो हमारा ग्रेजुएशन 2021 में ही कम्पलीट हो जाना चाहिए था। लेकिन अभी तक सिर्फ पार्ट 2 का एग्जाम ही हो पाया है। 4 साल बीत चुके हैं।                Image credit-Google    छोटा मोटा धरना प्रदर्शन कर के ऊब चुके हैं। ना कोई हमारा सुनने वाला है ना कोई समझने वाला है।  2018 में जुलाई...

Ravish Kumar को क्यों कहना पड़ा, Narendra Modi आजीवन चुनाव जीतते रहें लेकिन किसी भी मोदी समर्थक को यह अन्याय दिखना चाहिए की 50 हज़ार युवाओं...

          Image source-google  रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सवाल पूछने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस बार उन्होंने 'अग्निपथ योजना' को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं से उनकी पसंद का सम्बोधन किया है। युवाओं के नाम उनकी पसंद का संबोधन  सरकार को एक बार सोचना चाहिए। यह बहुत ग़लत है। पचास हज़ार युवाओं की तैयारी और मेहनत पर पानी फेर दिया है। अग्निपथ के नाम पर इन भर्तियों को ख़त्म कर उनके ऊपर पाषाण प्रहार हुआ है।मोदी आजीवन चुनाव जीतते रहें लेकिन किसी भी मोदी समर्थक को यह अन्याय दिखना चाहिए। इतने सपनों को कुचल देना ठीक नहीं।    ये पचास हज़ार भी तो आजीवन मोदी समर्थक हैं तो इन्हें क्यों सज़ा दी जा रही है? अच्छा हुआ इस देश में दूसरा विकल्प नहीं है वरना युवाओं को ऐसी सज़ा प्राप्त करने का सौभाग्य ही नहीं मिलता। जिस भीड़ के दम पर सब हुआं हुआं करने लगे थे, इस ख़बर से कम से कम यही देख लें कि आप भीड़ के हैं, आप भीड़ में हैं लेकिन भीड़ आपकी नहीं है। भीड़ केवल उनके लिए हैं। वह केवल मोदी की है, जैसे आप केवल मोदी के हैं। आज अगर राजनीति में ध...

टाइगर सिंबल वाले शिव सैनिक उद्धव को मुंबई के पिंजड़े से निकल गुवाहाटी चले जाने को क्यों कहा रवीश कुमार ने, आईए जानते हैं

             Image source-google  रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सरकार से सख्त सवाल पूछते हैं। उनका मानना है कि सवाल सरकार से होती है, विपक्ष से नहीं। इस बार उन्होंने महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक ड्रामें के बीच उद्धव ठाकरे से क्या कहा आईए जानते हैं। टाइगर सिंबल वाले शिव सैनिक उद्धव मुंबई के पिंजड़े से निकल गुवाहाटी चले जाएँ  उद्धव ठाकरे ने कहा कि विधायक सामने आकर कहें तो इस्तीफ़ा दे देंगे। संजय राउत दिन भर बोलते-बोलते थक गए होंगे कि मुंबई आ जाएँ। जो मुंबई में हैं, वो भी गुवाहाटी चले गए। तो ऐसे में उद्धव को क्या करना चाहिए? अगर विधायक उनके सामने नहीं आ रहे हैं तो क्या उद्धव को विधायकों के सामने नहीं चले जाना चाहिए। पूरी पार्टी ही गुवाहाटी चली गई है। उद्धव मुंबई में क्या कर रहे हैं? कम से कम अपने विधायकों के लिए मुंबई से बड़ा-पाव लेकर जा ही सकते हैं।   दलबदल एक माइंड गेम है। इसका अंजाम पहले से तय था और जैसा तय था, वैसा ही होगा। बीच की सारी घटनाएँ और सूचनाएँ परचून का सामान लाने के जैसी हैं। उद्धव को भी माइंड गेम ख...

Ravish Kumar ने क्यों कहा, Modi जी जनता की बचत का राष्ट्रीयकरण कर दें ताकि जनता...'

                Image source-twitter  रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सरकार से सख्त सवाल पूछते हैं। उनका मानना है कि सवाल सरकार से होती है, विपक्ष से नहीं। इस बार उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी से एक अपील की है ताकि जनता को राहत मिल सके। आईए जानते हैं  रवीश कुमार ने क्या कहा है। अब आपकी बचत का राष्ट्रीयकरण ही बचा है, थाली निकालिए और माँग कीजिए बीमा का प्रीमियम ऐसे बढ़ने लगा है, जैसे सारा ग्रोथ रेट बीमा के भरोसे बैठा हो। कई कई हज़ार प्रीमियम बढ़े हैं। सरकार चाहे तो प्रीमियम पर जीएसटी डबल कर 36 प्रतिशत कर सकती है।    कंपनियाँ भी प्रीमियम बढ़ा सकती हैं। लोग मारे ख़ुशी के बरसात में दौड़ पड़ेंगे। व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी ने इतना तो कर ही दिया है कि सुई की तरह चुभने वाली महंगाई को लोग दवाई समझने लगे हैं। अब सुई की जगह छुरा भोंका जा रहा है। उफ़्फ़ करने तक की आदत चली गई है। फ़र्ज़ी डेटा पर इतना भरोसा करने वाला समाज शायद ही कहीं और है। सरकार कहती है कि महंगाई केवल पेट्रोल और खाद्य तेलों के कारण बढ़ी है, जनता ...

BJP ने कई राजनीति दलों को ख़त्म किए हैं। चुनाव में हरा कर नहीं बल्कि...- Ravish Kumar | Shiv Sena | Maharashtra

रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सरकार से सख्त सवाल पूछते हैं। उनका मानना है कि सवाल सरकार से होती है, विपक्ष से नहीं। इस बार उन्होंने महाराष्ट्र में हो रहे राजनीतिक उठा पटक पर अपनी राय वयक्त की है और लिखा है,               Image source-google   बीजेपी ने कई राजनीति दलों को ख़त्म किए हैं। चुनाव में हरा कर नहीं बल्कि जिससे हारी है, उसमें तोड़ फोड़ मचा कर और जाँच एजेंसियाँ लगा कर। बीजेपी कहेगी ही कि उसने ऐसा नहीं किया। क़ानून अपना काम कर रहा था और विधायक अपने आप पुराने दल छोड़ कर आ रहे थे।   शिवसेना को ध्वस्त कर देना बड़ी राजनीति घटना है। इस पार्टी को गुमान था कि उसके पास भी निष्ठावान नेता और कार्यकर्ता हैं। इसी दम पर शिवसेना शक्ति प्रदर्शन करती थी। अब उसी सेना के विधायक पार्टी से बग़ावत कर चुके हैं। इन्हें जाना तो बीजेपी में ही है क्योंकि एकनाथ शिंदे की शर्त है कि शिव सेना बीजेपी के साथ सरकार बनाए। शिव सेना ने हिन्दुत्व छोड़ दिया है। किसी को भी लग सकता है कि यह रास्ता किसके लिए बनाया गया है।    चुनाव में क्या...

Agnipath yojana पर हिंसा कर युवाओं ने विरोध का मौक़ा गँवा दिया-Ravish Kumar

 रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो छात्रों के सवाल को अपने प्राइम टाइम शो में दिखाते और छात्रों के सवाल को लेकर सरकार सरकार से कड़े सवाल पूछते आए हैं; लेकिन इस बार उन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे युवाओं को ही दोषी मान रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब रवीश कुमार ने सरकार के बजाए युवाओं को दोषी ठहराया है। ऐसा क्यों हुआ आइए उनके इस लेख से जानते हैं।                       Image source-google  हिंसा कर युवाओं ने विरोध का मौक़ा गँवा दिया ,जोश में युवाओं ने बड़ी ग़लती कर दी। हिंसा का रास्ता चुन कर उन्होंने ख़ुद से समाज के बड़े वर्ग को अलग कर दिया। यहाँ तक कि कई परीक्षाओं के रद्द होने औरपरीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुँच पाने के कारण युवाओं का भी समर्थन गँवा दिया।अगर युवा अपनी बातों में सरकार और समाज को ले आते तो उनकी चिन्ता को समर्थन मिलता। अब हर कोई भड़क गया है। कोई भी बहस उनके मुद्दे पर पहुँचने से पहले ही हिंसा की बात से रास्ता बदल लेती है।    हिंसा का सबसे बड़ा नुक़सान है कि दो दिनों के भीतर ...

'Agnipath yojana' का विरोध कर रहे युवाओं से Ravish Kumar ने क्यों कहा, हे भावी अग्निवीरों हिंसा रोक दो?

 रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो  छात्रों के सवाल को अपने प्राइम टाइम शो में दिखाते और छात्रों के सवाल को लेकर सरकार सरकार से कड़े सवाल पूछते आए हैं; लेकिन इस बार उन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे युवाओं से ही अपील करते हुए नज़र आ रहे हैं। रविश कुमार लिखते हैं!             Image source-google  हे भावी अग्निवीरों , हिंसा रोक दो। 19 जून को कई परीक्षाएँ हैं। बाक़ी युवा कैसे जाएँगे परीक्षा देने? हिंसा के कारण आपने समाज का समर्थन खो दिया है। पहले भी नहीं था लेकिन अब पूरी तरह खो दिया है। इस तरह की तोड़फोड़ और आगज़नी भयावह है। इतनी ट्रेनें जला दी गई हैं कि लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। आपने जैसे दूसरों को हराया, इस बार आपके हारने की बारी है। अपनी हार स्वीकार कर लें और हिंसा छोड़  दें। जीत चाहते हैं तो शांति से संवाद करें। विधायकों और सांसदों से बात करें।    यही वक्त है सोचने का कि कोई बात पसंद नहीं आई तो सबसे पहले हिंसा का ध्यान कैसे आया? आपका सपना टूटा है लेकिन किसका नहीं टूटा है। आप एक बार याद करे...

Agnipath yojana को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं से Ravish Kumar ने क्यों कहा, ऐसा कहने वाला पूरे देश में अकेला बंदा हूँ

 रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सवाल पूछने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस बार उन्होंने 'अग्निपथ योजना' को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को आड़े हाथों लिया है। आईए जानते हैं उन्होंने युवाओं से क्या कहा है। मेरे प्यारे आक्रोशित युवाओं, मीडिया तो अभी से आपको अग्निवीर कहने लगा। जिस नीति के विरोध में आप सड़कों पर उतरे हैं, उसी नीति के नाम से आपकी पहचान होने लगी है। आप तो अभी से अग्निवीर हो गए जबकि आप चार साल के लिए अग्निवीर नहीं होना चाहते हैं। आप कह रहे हैं कि हम अग्निवीर नाम का टी-शर्ट नहीं पहनेंगे, मीडिया ने आपको अग्निवीर नाम का टी-शर्ट पहना दिया। मुबारक हो, आप अभी से अग्निवीर बना दिए गए हैं।                  Image source-google  आपने जनता के बीच समर्थन भी खो दिया है। समाज के जिन तबकों के साथ मिलकर आपने आठ साल में  सांप्रदायिकता फैलाई है,दूसरों और ख़ुद में भी, उसके कारण आपके आंदोलन को लेकर कोई गंभीर नहीं है। सबको लगता है कि अभी दो चार एंटी मुस्लिम डिबेट आएगा, आपकी मांस-पेशियों में आनंद की लहरें दौड़ने लगेंगी। ...