रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की माँ का आज निधन हो गया! पत्रकार रवीश कुमार ने इस पर अफसोस जताते हुए निशब्द हो गए। रवीश कुमार अभी देश से बाहर हैं और ऐसे वो खुद को असहाय महसूस करते हुए लिखते हैं - माँ सोचा था ब्रसल्स को अपने लिए नहीं, अपने दर्शकों के लिए देखूंगा। यहां आते ही सब कुछ कैमरे के पीछे से देखने लगा। ज़हन में मां बनी रही कि वेंटिलेटर पर नहीं होती तो वही ज़्यादा खुश रहती, भले ही ब्रसल्स बोलना उसके लिए भारी हो जाता। इस सूचना को लेकर अपने साथ जीना पहाड़ ढोने के समान लग रहा है। यहां की इमारतों से न तो इतिहास का रिश्ता बना पा रहा हूं, न वर्तमान का। देख रहा हूं मगर कुछ नहीं दिख रहा है। चल रहा हूं लेकिन पता नहीं कितनी दूर चल गया और लौट कर आ गया। इस वक्त लिख रहा हूं ताकि खुद के साथ रह सकूं। मेरे लिए जीना लिखना है और लिखते-लिखते उसकी हंसी बार-बार लौट कर आ रही है। उसके लिए यहां की तस्वीर कितनी ख़ास होती, मगर अब उसी के कारण सब कुछ उजाड़ लग रहा है। दिन के वक्त यहां पांव रखने की जगह नहीं होती है। सुबह-सुबह इसके खाली अहाते को देखना उस रि...
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