Image source-google उदयपुर के कन्हैयालाल की हत्या आतंकी कार्रवाई है। जघन्य और बर्बर है। ऐसा करने वाले आस्था के नाम पर आहत की आड़ ले रहे हैं। उन्हें ठीक से पता है कि इससे हिंसा भड़क सकती है। ऐसा कर वे समाज में सबके लिए घोर असुरक्षा पैदा कर रहे हैं। आस्था के नाम पर आहत को फुटबॉल का खेल मत बनाइये कि एक किक उधर से लगेगी तो एक इधर से। ऐसे लोग समाज को हैवानियत की आग में झोंकना चाहते हैं। इन्हें आस्था और मज़हब से कोई मतलब नहीं। अच्छी तरह से पता होना चाहिए है कि ऐसे मुद्दों की एक सीमा होती है। बोलने लिखने के बाद इन्हें समाप्त मान लिया जाना चाहिए। अगर कोई इसे जान से मारने के स्तर पर ले जाता है तो निःसंदेह उसकी मंशा आहत के नाम पर समाज में आतंक पैदा करने की है। कन्हैया लाल के हत्यारे इस देश के विवेक और भाईचारे के हत्यारे हैं। नूपुर शर्मा के बयान की निंदा हो चुकी है। सरकार ने निंदा की है और बीजेपी ने पद से हटा दिया है। ठीक है क...
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