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पत्रकार रवीश कुमार की मां का निधन, लंबे समय से चल रही थीं बीमार ,आज पैतृक गांव लाया जाएगा अंतिम संस्कार के लिए

 रवीश कुमार इन दिनों विदेश में हैं। मां के निधन का समाचार सुनकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर की है। रेमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की मां यशोदा पाण्डेय का मंगलवार को निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं। रवीश कुमार की मां के निधन का समाचार फैलते ही तमाम लोग उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक ट्वीट कर रवीश कुमार की मां के निधन पर शोक जताया है।   अपने ट्वीट में नीतीश कुमार ने लिखा है, ‘वरिष्ठ पत्रकार श्री रवीश कुमार जी की माता जी यशोदा पाण्डेय जी का निधन दुःखद। वे एक सामाजिक और धर्मपरायण महिला थीं। दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है। बता दें कि मूल रूप से मोतिहारी के जितवारपुर गांव के (बिहार) के रहने वाले रवीश कुमार इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। कल ही उन्होंने यूट्यूब पर एक वीडियो डाली थी, जिसमें बताया था कि वह बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में हैं।   वहीं, मां के निधन का समाचार सुनने के बाद रवीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है -" माँ...

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की माँ नहीं रही !

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार की माँ का आज निधन हो गया!  पत्रकार रवीश कुमार ने इस पर अफसोस जताते हुए निशब्द हो गए। रवीश कुमार अभी देश से बाहर हैं और ऐसे वो खुद को असहाय महसूस करते हुए लिखते हैं -    माँ  सोचा था ब्रसल्स को अपने लिए नहीं, अपने दर्शकों के लिए देखूंगा। यहां आते ही सब कुछ कैमरे के पीछे से देखने लगा। ज़हन में मां बनी रही कि वेंटिलेटर पर नहीं होती तो वही ज़्यादा खुश रहती, भले ही ब्रसल्स बोलना उसके लिए भारी हो जाता। इस सूचना को लेकर अपने साथ जीना पहाड़ ढोने के समान लग रहा है। यहां की इमारतों से न तो इतिहास का रिश्ता बना पा रहा हूं, न वर्तमान का। देख रहा हूं मगर कुछ नहीं दिख रहा है। चल रहा हूं लेकिन पता नहीं कितनी दूर चल गया और लौट कर आ गया। इस वक्त लिख रहा हूं ताकि खुद के साथ रह सकूं। मेरे लिए जीना लिखना है और लिखते-लिखते उसकी हंसी बार-बार लौट कर आ रही है। उसके लिए यहां की तस्वीर कितनी ख़ास होती, मगर अब उसी के कारण सब कुछ उजाड़ लग रहा है।  दिन के वक्त यहां पांव रखने की जगह नहीं होती है। सुबह-सुबह इसके खाली अहाते को देखना उस रि...