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Pradeep Mehra- देश सेवा के लिए 4 दिन मौका मिले या चार साल गर्व की बात है, मुझे देश की सेवा करनी है

              Image source-google  दिन में नौकरी और रात में आर्मी में जाने का अपना सपना पूरा करने के लिए 10 किमी की दौड़ लगाने वाले 19 साल के प्रदीप मेहरा (Pradeep Mehra) तो आपको याद ही होंगे। भले ही अग्निपथ स्कीम का विरोध देश के कई राज्यों में हुआ, ट्रेनें जलाई गईं, हिंसा हुई। लेकिन इसका असर न सरकार पर हुआ न देश के 6 राज्यों में लोकसभा की 3 और विधानसभा की 7 सीटों के लिए हुए उपचुनाव के नतीजों पर। बहुत सारे लोगों को लग रहा था कि इस विरोध के कारण मोदी सरकार को बहुत नुकसान हो सकता है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं देखने को मिला। इस अग्निपथ योजना का जहां विरोध प्रदर्शन किया है युवाओं ने वहीं ऐसे भी युवा हैं जो देश की सेवा करना चाहते हैं। उन्हें वर्दी 4 दिन के लिए हो फिर 4 साल के लिए इससे फर्क नहीं पड़ता।                       Image source-google    ऐसा ही जज्बा देखने को मिला 19 साल के प्रदीप मेहरा के अंदर है। वही लड़का जो   इंटरनेट के माध्यम से रातों रात Midnight Runner के नाम से ...

Ravish Kumar को क्यों कहना पड़ा, Narendra Modi आजीवन चुनाव जीतते रहें लेकिन किसी भी मोदी समर्थक को यह अन्याय दिखना चाहिए की 50 हज़ार युवाओं...

          Image source-google  रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो सवाल पूछने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस बार उन्होंने 'अग्निपथ योजना' को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं से उनकी पसंद का सम्बोधन किया है। युवाओं के नाम उनकी पसंद का संबोधन  सरकार को एक बार सोचना चाहिए। यह बहुत ग़लत है। पचास हज़ार युवाओं की तैयारी और मेहनत पर पानी फेर दिया है। अग्निपथ के नाम पर इन भर्तियों को ख़त्म कर उनके ऊपर पाषाण प्रहार हुआ है।मोदी आजीवन चुनाव जीतते रहें लेकिन किसी भी मोदी समर्थक को यह अन्याय दिखना चाहिए। इतने सपनों को कुचल देना ठीक नहीं।    ये पचास हज़ार भी तो आजीवन मोदी समर्थक हैं तो इन्हें क्यों सज़ा दी जा रही है? अच्छा हुआ इस देश में दूसरा विकल्प नहीं है वरना युवाओं को ऐसी सज़ा प्राप्त करने का सौभाग्य ही नहीं मिलता। जिस भीड़ के दम पर सब हुआं हुआं करने लगे थे, इस ख़बर से कम से कम यही देख लें कि आप भीड़ के हैं, आप भीड़ में हैं लेकिन भीड़ आपकी नहीं है। भीड़ केवल उनके लिए हैं। वह केवल मोदी की है, जैसे आप केवल मोदी के हैं। आज अगर राजनीति में ध...

Agnipath scheme: अग्निपथ योजना पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने क्या कहा? | Ajit Doval

अग्निपथ योजना के घोषणा के बाद देशभर में  युवाओं के हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval)सामने आए हैं। उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में 'अग्निपथ योजना' को समय की जरूरत बताया है। अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना समेत राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी बात की है। आईए जानते हैं उन्होंने क्या कहा है ।               Image source-google   अग्निपथ योजना को लेकर विरोध कर रहे युवाओं को संदेश देने के लिए एनएसए अजीत डोभाल सामने आए और उन्होंने खुलकर अग्निपथ योजना से जुड़े हर मसले पर बातचीत की। अग्निवीरों की भर्ती से लेकर ट्रेनिंग और फिर पोस्टिंग तक के बारे में सबकुछ बताया। पढ़िए डोभाल के न्यूज़ एजेंसी ANI इंटरव्यू की बड़ी बातें...   'अग्निपथ योजना' क्यों लाई गई? (Why was the 'Agneepath scheme' introduced?): “अग्निपथ योजना समय की जरूरत है। भारत के आसपास माहौल बदल रहा है। बदलते समय के साथ सेना में बदलाव जरूरी है। इसे एक नजरिए से देखने की जरूरत है। अग्निपथ अपने आप में एक स्टैंडअलोन योजना नहीं है। 2014 में जब पीएम मोदी ...

बाबा रामदेव ने अग्निपथ योजना पर पीएम मोदी को क्या दी नसीहत? | Baba Ramdev | Agneepath Scheme | Narendra Modi

'अग्निपथ योजना' (Agneepath Scheme) पर बाबा रामदेव ( Baba Ramdev ) ने पीएम नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) से कह दी वो बात, जो कम से कम उनसे तो उम्मेद नहीं थी। इस योजना पर उन्होंने क्या कहा आईए जानते हैं।                       Image source-google  एक चैनल पर जब बाबा रामदेव से 'अग्निपथ योजना' के बारे में पूछा गया तो पीएम नरेंद्र मोदी को नसीहत देते हुए कहा कि, वैसे तो हमारे प्रधानमन्त्री जी बहुत ही विवेकी हैं, लेकिन जब भी वो किसी समुदाय के लिए फैसला लें तो उस समुदाय के लोगों का सम्मेलन बुला लें। जैसे किसानों के लिए कोई नीति बनानी हो तो किसानों का एक सम्मेलन बुला लें, जवानों के लिए कोई नीति बनानी हो तो जवानों का एक सम्मेलन बुला लें। इससे कोई भी गिला शिकवा न रहे। इससे लोग अग्निपथ के नाम पर सड़क पर अग्नि नहीं जलाएंगे।   इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने अग्निपथ योजना का बिना नाम लिए पीएम मोदी ने कहा कि ,'कुछ फ़ैसले, कई रिफॉर्म्स शुरू में अप्रिय लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ देश उन रिफॉर्म्स का लाभ अनुभव करता है।'  जबकि राष्ट्...

अग्निपथ योजना का सच | अग्निपथ योजना कितना सही या कितना ग़लत?| Reality of Agneepath Scheme | Good or Bad?

  अग्निपथ योजना क्या है ( What is Agnipath scheme?): अग्निपथ योजना' के अंतर्गत सेना में भर्ती होने वाले सैनिकों को 'अग्नीवीर' बोला जाएगा।जिसकी भी उम्र 17.5 से 21 साल के बीच में है और वो 10 वीं या 12 वीं पास है, वो अग्निपथ योजना के लिए आवेदन कर सकता है। इस योजना में सभी भर्ती प्रक्रिया पहले से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया जैसी ही होगी। सिर्फ इसमें अभी महिलाओं को शामिल नहीं किया गया है जो कहा गया है कि आनेवाले समय उन्हें भी इस योजना के तहत मौका दिया जाएगा। आज से तीन महीने बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जिसमें पहले साल के लिए 46,000 लोगों की भर्ती होनी है।             Image source-twitter  अग्निवीरों को मिलने वाले वेतन और सुविधा ( Salary and facilities to Agniveers ): 'अग्निपथ योजना' के अंतर्गत सेना में भर्ती होने वाले सैनिकों को नियमित रूप से सेना में शामिल होने वाले सैनिकों से ज्यादा सैलरी मिलेगी। पहले जो सेना भर्ती होती थी, उसमें पहले चार साल तक समान वेतन मिलता था, जोकि ₹21,700 प्रतिमाह होती थी; लेकिन इस योजना के अन्तर्गत आनेवाले को ₹30,000 प्रत...

Agnipath yojana पर हिंसा कर युवाओं ने विरोध का मौक़ा गँवा दिया-Ravish Kumar

 रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जो छात्रों के सवाल को अपने प्राइम टाइम शो में दिखाते और छात्रों के सवाल को लेकर सरकार सरकार से कड़े सवाल पूछते आए हैं; लेकिन इस बार उन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे युवाओं को ही दोषी मान रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब रवीश कुमार ने सरकार के बजाए युवाओं को दोषी ठहराया है। ऐसा क्यों हुआ आइए उनके इस लेख से जानते हैं।                       Image source-google  हिंसा कर युवाओं ने विरोध का मौक़ा गँवा दिया ,जोश में युवाओं ने बड़ी ग़लती कर दी। हिंसा का रास्ता चुन कर उन्होंने ख़ुद से समाज के बड़े वर्ग को अलग कर दिया। यहाँ तक कि कई परीक्षाओं के रद्द होने औरपरीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुँच पाने के कारण युवाओं का भी समर्थन गँवा दिया।अगर युवा अपनी बातों में सरकार और समाज को ले आते तो उनकी चिन्ता को समर्थन मिलता। अब हर कोई भड़क गया है। कोई भी बहस उनके मुद्दे पर पहुँचने से पहले ही हिंसा की बात से रास्ता बदल लेती है।    हिंसा का सबसे बड़ा नुक़सान है कि दो दिनों के भीतर ...