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जेपी आंदोलन से निकले दो नेताओं के हाथ और बिहार का वर्तमान हालात पर अंजनी कुमार का विश्लेषण

    जेपी आंदोलन से निकले दो नेताओं के हाथ बिहार पिछले तीन दशक से अधिक से है और भ्रष्टाचार और शिक्षा के हालात जैसे हैं उसे आप बेहतर जानते हैं. 1990 में अचानक से कोटा -पॉलिटिक्स के तहत सामाजिक न्याय का एक बैनर इस पूरी पॉलिटिक्स पर जरूर लग गया,जिसने सामाजिक न्याय की भावना और उद्देश्यों को समझे बगैर कुल मिला कर एक जातिवादी उन्माद पैदा किया.   बिहार और जातिगत राजनीति यह सही था कि बिहार के सामाजिक -राजनीतिक जीवन में जातिवादी आग्रह कांग्रेसी राज से ही बने हुए हैं. कांग्रेसी राज में वर्चस्व ऊँची कही जाने वाली जातियों का था, 1990 के बाद वह वर्चस्व पिछड़े वर्ग की दो दबंग जातियों में सिमट कर रह गया. सबसे बड़ी बात यह हुई कि 1996 में इस पूरी राजनीति के अगुआ लालू प्रसाद को भ्रष्टाचार के अपराध में सीबीआई ने धर दबोचा और एक नाटकीय शैली में उन्हें 1997 में जेल जाना पड़ा. तब से आज तक वह जेल के चक्कर में पड़े हुए हैं. बाद के दिनों में उन पर भ्रष्टाचार के और भी आरोप लगे,जिसकी जांच चल रही है.    इन दिनों भी उसी सिलसिले में सीबीआई सक्रिय है. लालू प्रसाद और उनके लोगों के ठौर -ठिकानों...

बिहार में आगामी चुनाव नीतीश कुमार के लिए चुनौती भी है और संभावना भी ?

        अनिल कपूर की एक फिल्म आयी थी जिसका नाम था "घरवाली बाहरवाली"। इस फिल्म में अनिल कपूर की एक घरवाली होती है और एक बाहरवाली होती है। राजनीति में नीतीश कुमार ने 'घरवाली' और 'बाहरवाली' के कॉन्सेप्ट का सफल प्रयोग किया है। इस प्रयोग के तहत 'घरवाली' यानी जिस पार्टी के साथ वे गठबंधन में होते हैं, उसे 'बाहरवाली' यानी विरोधी राजनीतिक दल के साथ चले जाने का खौफ दिखाकर दबाव में रखते हैं और आवश्यकता महसूस करने पर 'बाहरवाली' के साथ चले भी जाते है।  "घरवाली बाहरवाली" के कॉन्सेप्ट का सफल प्रयोग करने के लिए नीतीश कुमार एक गठबंधन या पार्टी के साथ रहते हुए बीच-बीच में दूसरे गठबंधन या पार्टी की तारीफ करते रहते हैं और उसके साथ सहयोग भी करते रहते हैं। एनडीए-1 में भी एक तरफ जहां उन्होंने भाजपा पर दबाव बनाने के लिए नरेंद्र मोदी के साथ अपने पोस्टर को मुद्दा बनाकर भोज रद्द कर दिया था, वहीं बीच-बीच में विरोधी पक्ष की मनमोहन सिंह सरकार की तारीफ भी कर दिया करते थे।   इसी तरह, जब वे महागठबंधन में आ गए, तो एक तरफ जहां वे तेजस्वी को "बच्चा"...

बिहार पॉलिटिक्स: मंत्री मंडल बना नहीं लेकिन मैं यादव हूं, मुझे मंत्री बनाइए , मैं कांग्रेस का एकलौता यादव विधायक हूं छत्रपति यादव

                          Image source-google   बिहार में कांग्रेस के विधायक छत्रपति यादव ने अपनी जाति बताकर मंत्री पद मांगा है। उन्होंने कहा कि मैं महागठबंधन से कांग्रेस पार्टी का एकमात्र यादव जाति (पिछड़ा वर्ग) का विधायक हूं। मुझे मंत्री बनाया जाए।   इसके लिए खगरिया से कांग्रेस के विधायक छत्रपति यादव ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी को लेटर पैड पत्र लिखकर कहा । साथ में वीडियो भी जारी किया है।    विधायक छत्रपति यादव ने उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि मैं महागठबंधन से कांग्रेस पार्टी का एकमात्र यादव जाति (पिछड़ा वर्ग) का विधायक हूं। बिहार की नवगठित महागठबंधन की सरकार में यादव जाति (पिछड़ा वर्ग) को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान दौर की राजनीति में जनहित में यादव जाति (पिछड़ा वर्ग) को मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाए। इससे कांग्रेस पार्टी से जुड़े यादव जाति (पिछड़ा वर्ग समुदाय) का मनोबल बढ़ेगा। मैं व्यक्तिगत तौर से कांग्रेस हित में आपसे अपील कर रहा हूं।   इतना ही नहीं छत्रपत...