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कभी मिडिल क्लास परिवार का लड़का, आज करोड़ों की कमाई वाला डिजिटल स्टार! ऐसी है Raj Shamani की संघर्ष कहानी

कहते हैं कि सफलता की चमक के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी होती है। सोशल मीडिया और पॉडकास्ट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले राज शमानी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। राज शमानी एक सामान्य मिडिल-क्लास परिवार से आते हैं। कम उम्र से ही उन्होंने बिजनेस और कमाई के अलग-अलग तरीकों को समझने की कोशिश शुरू कर दी थी। शुरुआत आसान नहीं थी और उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। राज ने अपनी जिंदगी के अनुभवों और सीख को सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी बात करने की शैली और बिजनेस से जुड़े कंटेंट को लोगों ने पसंद करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने पॉडकास्टिंग की दुनिया में कदम रखा और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों के इंटरव्यू लेने शुरू किए। आज उनका “ Figuring Out with Raj Shamani” पॉडकास्ट देश के चर्चित हिंदी-अंग्रेजी बिजनेस और पर्सनैलिटी पॉडकास्ट्स में गिना जाता है। उनके शो में बिजनेस, बॉलीवुड, खेल, राजनीति और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मेहमान नजर आते हैं। राज की कहानी का एक खास पहलू यह है कि उन्होंने सोशल मीडिया को सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे...

गांव में गोलगप्पे बेचने वाला लड़का बना ISRO में इंजीनियर: पढ़िए रामदास मारबड़े की मेहनत और जिद की प्रेरक कहानी!

महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव का लड़का, जो कभी अपने परिवार का पेट पालने के लिए सड़क किनारे गोलगप्पे बेचा करता था, आज देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (Indian Space Research Organisation) में बतौर इंजीनियर काम कर रहा है। यह कहानी है रामदास मारबड़े की, जिन्होंने कठिनाइयों को अपनी ताकत बनाया और अपने सपनों को साकार करने की मिसाल पेश की। गरीबी में बीता बचपन रामदास मारबड़े महाराष्ट्र के वर्धा जिले के एक छोटे से गांव से आते हैं। उनका परिवार बेहद गरीब था। बचपन से ही उन्होंने आर्थिक तंगी देखी और पढ़ाई के साथ-साथ अपने पिता की मदद के लिए गोलगप्पे का ठेला लगाया। स्कूल से लौटने के बाद रामदास गोलगप्पे बेचते, ताकि घर का खर्च चल सके। मेहनत और लगन से बदली किस्मत रामदास पढ़ाई में शुरू से ही तेज थे, लेकिन संसाधनों की कमी और आर्थिक परेशानियों के चलते उनका सपना अक्सर खतरे में पड़ जाता था। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। दिन में स्कूल और काम, और रात में पढ़ाई – यही उनका दिनचर्या बन गई। उनका सपना था कुछ बड़ा करना, अपने गांव और परिवार का नाम रोशन करना। इंजीनियरिंग की राह में चुनौत...

मात्र 5 साल की उम्र में सर से उठ गया पिता का साया, बेटी बनी गांव की पहली बीपीएससी अधिकारी!

 यह कहानी है एक ऐसी बेटी की जिसने अपनी मेहनत और लगन से ना केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया। छोटी सी उम्र में पिता को खो देने के बाद जीवन में चुनौतियां कई गुना बढ़ गईं। मगर इस बेटी ने हार मानने के बजाय हर मुश्किल का डटकर सामना किया और अपनी लगन और हौसले से इतिहास रच दिया।    पिता के गुजरने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया, लेकिन मां ने बेटी को पढ़ाई जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। गांव में सीमित सुविधाओं के बावजूद इस बेटी ने कभी अपनी शिक्षा से समझौता नहीं किया। दिन-रात मेहनत करते हुए उसने बीपीएससी की परीक्षा पास की और अपने गांव की पहली महिला अधिकारी बन गई। आज यह बेटी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों में अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद खो बैठते हैं। उसकी कहानी बताती है कि मजबूत इरादे और लगातार मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। लवली कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग 69 वीं की परीक्षा में बिहार में 88 स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रौशन किया है। वे राजस्व पदाधिकारी के पद पर चयनित हुई है। उनके चयन से क्षेत्रवास...

बिहार के गांव के लड़के ने रचा इतिहास: बना जूनियर वैज्ञानिक, मिली बड़ी उपलब्धि!

बिहार के गांवों में छिपी प्रतिभाओं ने एक बार फिर से अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। एक साधारण परिवार से आने वाले इस होनहार लड़के ने अपनी मेहनत और लगन से ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन गया है। इस प्रतिभाशाली छात्र को जूनियर वैज्ञानिक के तौर पर बड़ी पहचान मिली है। ग्रामीण परिवेश में सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी सफलता हासिल करना युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। दिव्यांशु भूषण की यह उपलब्धि उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और कठिन परिश्रम से उन्हें पूरा करने की कोशिश करते हैं। उनके माता-पिता का गर्व स्वाभाविक है, और क्षेत्र के लोग भी उनकी इस सफलता से गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। प्रेरणा देने वाली कहानी यह लड़का बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला है, जो समस्तीपुर जिला के विद्यापति नगर प्रखंड के बाजीतपुर गांव का सुदूर क्षेत्र है। जहां न तो तकनीक की भरमार है और न ही उच्च शिक्षा के साधन। बावजूद इसके, उसने अपनी पढ़ाई और वैज्ञानिक अनुसंधान में रुचि से यह मुकाम हासिल किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उसने विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। जू...

Success story: कभी अनाथालय में रहने वाला लड़का, आज UPSC अधिकारी बन सबकों चौंकाया !

“मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों ने जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों में उड़ान होती है।” कुछ ऐसे ही बुलंद हौसले वाले शख्स हैं शिहाब। जिन्होंने अनाथालय में रहकर UPSC जैसे एग्जाम को क्लियर करने का सपना बचपन में देखा और उसे पूरा करके भी दिया।   सिविल सर्विसेज की परीक्षा में पास होकर अपना करियर बनाने का सपना बहुत सारे स्टूडेंट्स देखते हैं लेकिन सभी का सपना पूरा नहीं हो पाता। कई बार ऐसा होता है कि उनके हालात और संसाधनों की कमी कई बार उनकी राह का रोड़ा बन जाते हैं। लेकिन केरल के रहने वाले शिहाब ने इन मुश्किलों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया, सालों तक अनाथालय में रहने के बाद भी उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को पास किया और स्टूडेंट्स की प्रेरणा बने। नाम: मोहम्मद अली शिहाब  जन्म: 15 मार्च 1980 यूपीएससी रैंक: 226 वीं रैंक जो भी स्टूडेंट्स सिविल की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं उनके लिए शिहाब की कहानी बहुत प्रेरणादायी साबित होगी। कौन है मोहम्मद अली शिहाब? शिहाब का जन्म 15 मार्च 1980 को हुआ था, उनके पिता का नाम कोरोट अली और माता का नाम फातिमा था। उनका एक बड़ा भ...

Success Story: 4 साल में 8 जॉइनिंग लेटर ! बिहार के इस लाल ने लगा दी सरकारी नौकरी की लाइन!

 अपनी लगन और मेहनत से 24 वर्षीय रवि रंजन ने अभी तक 8 नौकरियां यथा एसएससी सीजीएल(ऑडिट ऑफिसर), मौसम विभाग(वैज्ञानिक सहायक), डाक विभाग(पोस्टल असिस्टेंट),रेलवे विभाग, कृषि विभाग एवम एसएससी एमटीएस आदि में सफ़लता हासिल कर चुके है! अभी वर्तमान में मौसम विभाग में कार्यरत है! रवि रंजन अभी भी सिविल सेवा यूपीएससी एवम बीपीएससी के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे है!   बिहार के भोजपुर जिला के बिहिया प्रखंड के तियर गांव निवासी रवि रंजन बिहार एसएससी सीजीएल परीक्षा उत्तीर्ण करके बिहार सचिवालय सेवा के अंर्तगत सामान्य प्रशासन विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के रूप में चयानित हुए है! पूरे बिहार में 42 वा रैंक है !    Subscribe on YouTube 👉 Bharat prime  अपने प्रखंड से एकलौते अभ्यर्थी के रूप में चयनित होने से पूरे प्रखंड एवम तियर गांव में खुशी की लहर है! इन्होंने अपनी सफ़लता का श्रेय पूरे परिवार, गुरूजन एवम मित्रजन को दिया है जिन्होंने हर समय उनकी मदद की!  रवि रंजन एक किसान परिवार से आते है! इनके पिताजी श्री लालबाबू यादव बहुत ही मेहनती किसान और शिक्षा के लिए तत्पर इंसान है! मुश्...

Success Story: बाप रे! 4 दिन में 4 जॉइनिंग लेटर ! बिटिया ने लगा दी सरकारी नौकरी की लाइन, बोली माता-पिता की ख्वाहिश पूरी की!

 Bihar Girl Success Story : बिहार की बेटी ने अपनी लगन और मेहनत से अपना ही नहीं परिवार का भी नाम रौशन किया है। उन्होंने 4 परीक्षाओं में कामयाबी से 4 सरकारी नौकरी पर अपना कब्जा जमाया है। हालांकि, इस अफसर बिटिया का ड्रीम प्लान तो कुछ और ही है, जानिए पूरा मामला। Xxxx समस्तीपुर: एक कहावत है म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं क्या? बिहार के समस्तीपुर में गांव की एक लड़की ने कुछ ऐसा ही कमाल किया, जिसकी चर्चा हर कोई कर रहा। इस बिटिया ने एक दो नहीं बल्कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर 4 नौकरी में दावेदारी की है। लोग जहां एक सरकारी नौकरी को लेकर कोशिश में जुटे रहते हैं, बिहार की इस बेटी ने 4 सरकारी नौकरी पर कब्जा जमा के हर किसी को चौंका दिया। यही नहीं समस्तीपुर की इस 'बिटिया' ने इसके साथ ही बीएड की भी डिग्री ले रखी है। हालांकि, समस्तीपुर की इस बेटी का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है, उनका प्लान तो कुछ और ही है। चार सरकारी नौकरी का ऑफर मिलने के बाद भी अब वो कौन सा मुकाम हासिल करना चाहती हैं बताते हैं आगे।   नहीं चार-चार सरकारी नौकरी हासिल कर सबको चौंकाने वाली ये हैं ज्योति कुमारी, जि...

बदल गई क़िस्मत: मां मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया, काबिल निकला ट्रक चलाने वाला बेटा, बना BPSC अधिकारी!

  मां ने भैंस चराकर बेटे को पढ़ाया 6 बार सफल न रहने के बाद 7 वीं बार में BPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बना। 205 वीं रैंक हासिल की..   जब शिव शक्ति 3 के ही थे तभी पिता का  निधन हो गया था; मां ने खेती- मजदूरी कर अपने 5 बच्चे को पाला। इस लड़के को BPSC अधिकारी पद से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं था हौसले और संघर्ष से पाली अपनी मंजिल! सफलता और लक्ष्य के रास्ते में रोड़ा आने पर अपने रास्ते बदल देने वाले मुसाफिर बहुत देखे होंगे लेकिन आज देख लीजिए एक ऐसा अडिग व्यक्ति जो अपने लक्ष्य से कभी नहीं  भटका! धैर्य दृढ़ता और सफलता का मिसाल है यह अधिकारी! पांच भाई बहन की जिम्मेदारी मां कालिंदी देवी पर आ गई। शिव शक्ति बताते हैं, मां पढ़ी-लिखी न हीं थीं, लेकिन शिक्षा की ताकत को जानती थी। मां ने खेत में मजदूरी की और भैंस पालकर हमारी परवरिश की और पढ़ाया लिखाया। हम भी बड़े हुए तो स्कूल से खाली होने के बाद खेत में काम करते थे।   कॉन्वेंट तो सपने में नहीं देखा, सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई हुई। नाना और नानी से जो पैसा मां को साग सब्जी के लिए मिलता था, वह उसे बचाकर मेरी पढ़ाई में लगा देती थी। मै...

मां ने भैंस चराकर बेटे को पढ़ाया, बेटे ने ट्रक चलाई अचानक बन गया बीपीएससी आधिकारी लोग देखते रह गए !

मां ने भैंस चराकर बेटे को पढ़ाया 6 बार सफल न रहने के बाद 7 वीं बार में BPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बना।  205 वीं रैंक हासिल की..   जब शिव शक्ति 3 के ही थे तभी पिता का निधन हो गया था; मां ने खेती- मजदूरी कर अपने 5 बच्चे को पाला। इस लड़के को BPSC अधिकारी पद से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं था हौसले और संघर्ष से पाली अपनी मंजिल! सफलता और लक्ष्य के रास्ते में रोड़ा आने पर अपने रास्ते बदल देने वाले मुसाफिर बहुत देखे होंगे लेकिन आज देख लीजिए एक ऐसा अडिग व्यक्ति जो अपने लक्ष्य से कभी नहीं  भटका! धैर्य दृढ़ता और सफलता का मिसाल है यह अधिकारी! पांच भाई बहन की जिम्मेदारी मां कालिंदी देवी पर आ गई। शिव शक्ति बताते हैं, मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन शिक्षा की ताकत को जानती थी। मां ने खेत में मजदूरी की और भैंस पालकर हमारी परवरिश की और पढ़ाया लिखाया। हम भी बड़े हुए तो स्कूल से खाली होने के बाद खेत में काम करते थे।   कॉन्वेंट तो सपने में नहीं देखा, सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई हुई। नाना और नानी से जो पैसा मां को साग सब्जी के लिए मिलता था, वह उसे बचाकर मेरी पढ़ाई में लगा देती थी। मैट्रिक प...

बिहार के समस्तीपुर के शशि भूषण ने रच दिया इतिहास, एशियाई खेल में लिए बने भारतीय कुश्ती टीम के मुख्य कोच !

  एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए भारत के 18 पहलवान शनिवार को चार से सात अक्टूबर तक होने वाले कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने चीन के हेंजगो के लिए रवाना हो गई है। इस टीम के साथ मुख्य कोच के रूप में शाहपुर पटोरी के शशिभूषण प्रसाद को शामिल किया गया है। एशियाई खेलों के लिए कुश्ती के इतिहास में बिहार का पहला कुश्ती मुख्य कोच के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व का अवसर मिलने पर क्षेत्र के लोगों में काफी हर्ष व्याप्त है। पटोरी प्रखंड के प्यारेपुर निवासी रामनाथ राय के पुत्र शशि भूषण प्रसाद वायु सेवा में वारंट ऑफिसर के रूप में दिल्ली में कार्यरत हैं। इससे पूर्व भी शशि भूषण ने कोच के रूप में भारतीय टीम को कई पदक दिला चुके हैं। शशि भूषण प्रसाद ने बताया कि ग्रीको रोमन शैली के लिए भारतीय कुश्ती टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया है। इस टीम में कुश्ती में एशियाई स्वर्ण पदक विजेता 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार, 67 किलोग्राम में सीनियर एशियाई पदक विजेता नीरज, 60 किलोग्राम में ज्ञानेंद्र, 77 किलोग्राम में विश्व रैंकिंग पदक विजेता विकास, 130 किलोग्राम में 10 बार के नेशनल चैंपियन नवीन भी शामिल हैं...

बाप रे! मजदूर पिता की बेटी सोनाली स्टेट फुटबॉल टीम में शामिल !

  ज़रूर, यह एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है। एक गरीब मजदूर परिवार की बेटी ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर राज्य स्तरीय फुटबॉल खिलाड़ी बनने का सपना पूरा किया। यह कहानी हमें बताती है कि अगर हम अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहें और कड़ी मेहनत करें, तो हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। इस कहानी की मुख्य पात्र सोनाली हैं, जो बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता विनोद राय एक मजदूर हैं और उनकी माँ एक गृहिणी हैं। सोनाली को बचपन से ही फुटबॉल खेलने का शौक था। वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलती थीं। सोनाली के खेल में प्रतिभा को देखते हुए, उनके पिता ने उन्हें एक स्थानीय फुटबॉल क्लब में दाखिला दिलवाया। सोनाली ने अपने खेल में लगातार सुधार किया और जल्द ही वह एक बेहतरीन खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और कई पुरस्कार जीते। हाल ही में, सोनाली को बिहार राज्य की महिला अंडर 14 फुटबॉल टीम में शामिल किया गया है। वह टीम की एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उन्होंने कई महत्वपूर्ण मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है। सोनाली की कहानी हमें बताती है कि अगर हम अ...

ससुराल से मिले आइडिया ने इस किसान की बदल दी किस्मत! अब खेती से ही कर रहे हैं 6 लाख रुपए की कमाई

बिहार में नकदी फसल की खेती को लेकर किसानों का रूझान लगातार बढ़ रहा है. इसके पीछे की मुख्य वजह परंपरागत खेती में अधिक मुनाफा नहीं होना है. परंपरागत फसलों की खेती में वक्त और मेहनत अधिक लगता है, लेकिन उस अनुसार कमाई नहीं हो पाती है. इसके उलट नकदी फसल की खेती में कम समय और कम लागत में अधिक मुनाफा किसानों को हो जाता है. यही वजह है कि नगदी फसल में सर्वाधिक सब्जी खेती करने में किसान दिलचस्पी ले रहे हैं.   बेगुसराय :किसान ने बताया कि 1990 में शादी हुई. शादी के बाद जब ससुराल गए तो साला ने आस-पास के किसानों से मिलवाया. परवल की खेती कर रहे किसानों से तरीका और कमाई के बारे में भी जानकारी दिलाई. बेगूसराय के किसान भी अब बड़े पैमाने पर सब्जी कर खेती करने लगे हैं और इससे मुनाफा भी कमा रहे हैं. आज हम बेगूसराय के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार की बात कर रहे हैं. जो 1990 से ही सब्जी की खेती कर रहे हैं. मनोज को सब्जी की खेती करने की प्रेरणा उनके ससुराल से मिली. इसके बाद 10 कट्ठे में परवल की खेती से इसकी शुरूआत की. परवल की खेती में मुनाफा हुआ तो दो बीघा में खेती करने लगे हैं. सब्जी की खेती के सहारे ही पां...

Success Story of labourer's son : मजदूर का बेटा बना जेल अधीक्षक, नौकरी से समय निकालकर की पढ़ाई

  Success Story of labourer's son : सफलता मेहनत करने वालों के कदम चूमती है. यह बात सच साबित किया है छत्तीसगढ़ के एक गांव के लड़के ने. मजदूर के बेटे ओम प्रकाश साहू ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करके जेल अधीक्षक बनने में सफलता हासिल की है.   Success Story : मेहनत और लगन के बल पर अपना वक्त बदला जा सकता है. इस बात को साबित किया है छत्तीसगढ़ के एक मजदूर के बेटे ने. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के रहने वाले ओमप्रकाश साहू छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2022 की परीक्षा पास करके जेल अधीक्षक बने हैं. उनकी इस सफलता से माता-पिता सहित पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के पंवरजली गांव के रहने वाले ओमप्रकाश तीन भाई-तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं. उनसे छोटे एक भाई और बहन हैं. ओमप्रकाश ने बचपन से ही माता-पिता को मजदूरी करते देखा है. इसके बाद उन्होंने अपनी किस्मत खुद गढ़ने का फैसला किया. उन्होंने सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी शुरू की. अब उनका सपना हकीकत में बदल चुका है।   ओम प्रकाश साहू ने मीडिया को बताया कि गरीब परिवार होने के चलते मजदूरी करना पड़...

बदल गई क़िस्मत: पिता लगाते थे हलीम का ठेला, काबिल निकला जूठी प्लेटें धोने वाला बेटा, बना जज

 कहते हैं किस्मत कभी एक-सा नहीं रहता. जज की परीक्षा पास करने वाले कासिम और उनके परिवार का वक्त भी बदलने वाला है. कभी ठेले में जूठे बर्तन धोने वाला लड़का एक दिन जज बनकर लोगों को इंसाफ पाने में मदद करेगा, ऐसा किसने सोचा होगा भला, आइए जानते हैं कासिम की कहानी...   यहां वो कहावत चरितार्थ करती है कि... कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...ये पंक्ति यूपी के संभल से पीसीएस जे में बाजी मारकर 135 वी रैंक हासिल करने वाले 29 वर्षीय कासिम पर सटीक बैठती है. कासिम अब से कुछ साल पहले तक खुद ठेला लगाकर हलीम बचने का काम करते थे. शुरुआती शिक्षा के दौरान उनका बचपन पिता के ठेले पर ही गंदी प्लेटे धोने में बीता है. लेकिन कुछ सालो में ही वक्त ऐसा बदला कि तमाम सघर्षो का बचपन बीतने के साथ ही कासिम ने अपने परिवार और संभल का नाम रोशन कर दिखाया है.  ठेला लगाकर अपने परिवार की गुजर बसर में साथ निभाने वाले कासिम ने अपनी मां से मोटिवेट होकर हौसलों की उड़ान भरते हुए अब मंजिल पा ली है. संभल के नखासा थाना इलाके के रुकनुद्दीन सराय निवासी 29 वर्षीय मोहम्मद कासिम...

समस्तीपुर की शान है यह बहनें.. मां और पिता का त्याग से दोनों बेटियों ने पास किया NEET का एग्जाम

        image: bharatprime.com बिहार के समस्तीपुर जिले की दो बहन ने गांव समेत अपनी मां बाप के सपने को पूरा किया है. एक मां जिसका सपना था कि उनकी दोनों बेटी पढ़ लिखकर डॉक्टर बने. लोग ताने मारते रहे, लेकिन मां ने सब कुछ सहन करते हुए अपनी दोनों बेटियों को एक दिन इस मुकाम तक पहुंचाकर ही दम लिया (Samastipur two sisters Crack NEET EXAM).  इन दोनों बहनों का नाम है आस्था और एकता। फिल्मी कहानी से कम नहीं है इस मां बाप की संघर्ष की कहानी: समस्तीपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर मोहिउद्दीन नगर प्रखंड का आनन्द गोलवा गांव है. जहां से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्म से कम नहीं है. कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था दंगल, ये कहानी इस कहानी से सटीक बैठती है. फर्क बस इतना है कि उस फिल्म में एक पिता ने अपनी बेटीयों के लिए खूब संघर्ष किया था और यहां एक मां और पिता ने अपनी बेटियों की सफलता के लिए दिन रात मेहनत की. एक मां की दो बेटी पास की नीट परीक्षा: आनन्द गोलवा गांव की विभा सिंह की सिर्फ़ दो बेटी हीं है, अपनी दोनों बेटियों के लिए उन्होंने सिर्फ संघर्ष ही नहीं किया बल...

खेती करने वाली 60 वर्षीय दादी रातों रात बनी यूट्यूब सेन्सेशन, जानिए इनकी कहानी क्यों अहम है

एक बार इंसान अपनी खूबी को पहचान ले, तो वो हर वो चीज हासिल कर सकता है। ख़ास कर आज के सोशल मीडिया और इन्टरनेट के ज़माने में। सोशल मीडिया के दौर में टैलेंटेड इंसान को बस अपना टैलेंट पहचानने की ज़रूरत है।    जैसे 60 Gangavva Milkuri ने किया। 60 साल की ये दादी रातोंरात यूट्यूब सेन्सेशन बन गई हैं। वो भी तब जब उन्हें इंटरनेट के बारे में ज़्यादा कुछ पता नहीं है।   आज आप जानिए भारत के तेलंगाना की दादी मां Gangavva Milkuri के बारे में! Gangavva तेलंगाना के Lambadipally गांव की रहने वाली हैं। एक समय में दादी घरेलू हिंसा का शिकार हो चुकी हैं। 5 लोगों के परिवार के पालन-पोषण की ज़िम्मेदारी पूरी करने के लिये उन्होंने खेती करना शुरू किया। खेतों में मज़दूरी, कुली और सिगरेट रोलर के रूप में काम करके उन्होंने ज़िदगी का आधा हिस्सा गुज़ारा। इन सबके अलावा टॉलीवुड फ़िल्मों में भी वो अपना जलवा दिखा चुकी हैं।   Gangavva का पति शराबी था और शराब पीकर उन पर घरेलू हिंसा भी करता था, इसलिए उन्होंने परिवार चलाने की ज़िम्मेदारी उठाई, ताकि उनके बच्चों का भविष्य बेहतर हो। वहीं पति की मौत के बाद G...

Super 30 वाले आनन्द कुमार ने अपने बेटे की इस उपलब्धी पर कहा दिल छू लेने वाली बात...!

  मां के बनाए पापड़ों को साइकिल पर घर-घर ले जाकर बेचने वाला शख्स आज अगर गरीब बच्चों को आईआईटी (I.I.T) जैसी बड़ी संस्थाओं में पढ़ने के लिए तैयार करना उनकी जीवन की बड़ी सफलताओं में से एक रहा है। आज जब खुद आनन्द कुमार के बेटे ने ऐसा कर दिखाया कि पिता अपने खुशी को जाहिर करते हुए लिखा,                 आनन्द कुमार ने बेटे के सफ़लता पर कहा  'बेटा जगत आज तुमने जिस समझदारी से शतरंज की चाल चलकर इंटर स्कूल शतरंज प्रतियोगिता में फर्स्ट प्राइज जीत कर मुझे गर्वान्वित होने का मौका दिया है, ठीक उसी तरह से जिंदगी के कांटे भरे रास्ते में भी अपने हर कदम को सूझ बूझ के साथ बढ़ाते हुये एक अच्छा इंसान बनना ऐसा मेरा आशीर्वाद है।' कौन हैं सुपर 30 वाले आनन्द कुमार और क्यों हैं ख़ास? Super 30 वाले आनंद कुमार उन लाखों युवाओं का मार्गदर्शक और प्रेरणा हैं जो गरीब हैं किंतु जिनमें कुछ करने का जज्बा है। उनके द्वारा स्टार्ट किया हुआ एक संस्था है जिसके अंतर्गत वे हर साल पूरे बिहार से 30 ऐसे बच्चों को चुनते हैं जो प्रतिभाशाली हैं पर इतने गरीब हैं कि उनके माता-पिता उनक...

मां की मौत हुई तो पिता ने घर से निकाल दिया, नाना-नानी के घर रहकर श्रीजा ने CBSE की 10वीं में 99.4 फीसदी मार्क्स लाकर बिहार में किया टॉप

                                          Image source-google  Sreeja Success Story: CBSE बोर्ड ने दसवीं का रिजल्ट घोष‍ित कर दिया है। बिहार की रहने वाली श्रीजा ने 10वीं की परीक्षा में राज्य में टॉप किया है। उन्होंने 99.4 फीसदी अंक हासिल किए हैं। सोशल मीडिया पर श्रीजा के संघर्षों की कहानी वायरल हो रही है, जिसे सुनकर हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है। CBSE Bihar Topper Sreeja Success Story: सीबीएसई बोर्ड के नतीजे घोषित हो चुके हैं और हर तरफ बिहार में दसवीं क्लास की टॉपर श्रीजा की चर्चा है. बिहार की इस टॉपर बेटी की कहानी किसी को भी भावुक कर सकती है, साथ ही जीवन में बेहतर करने की प्रेरणा दे सकती है।                   एक वीडियो में श्रीजा की नानी बताती हैं कि श्रीजा के जन्म के 4 साल बाद ही उसके सिर से मां का साया हट गया था। मां के गुजरने के कुछ समय बाद पिता ने भी उसे घर से निकाल दिया और दूसरी शादी रचा ली। श्रीजा अपने नाना-नानी के ...

समस्तीपुर में बस कंडक्टर का बेटा बना दरोगा:30 साल से बस कंडक्टर हैं पिता, मुश्किल से बेटे को पढ़ाया था

                    मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। कुछ ऐसा ही करके दिखाया है बिहार के समस्तीपुर के मोहीउद्दीन नगर प्रखण्ड के हरैल पंचायत के चापर गांव के पवन ने। उनका कहना है कि जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिज़ूल है। कद आसमान का। आखिर क्या है पूरा मामला जानिए  इंसान के इरादे और हौसले ही उसकी ताकत हैं। कुछ करने का जज्बा हो, तो राह कांटो भरा ही क्यों ना हो आसान हो जाती है। समस्तीपुर जिले के चापर गांव के बस कंडक्टर का बेटा पवन ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। अपनी लगन और अथक प्रयास के बूते वे बिहार पुलिस में दारोगा बन गए हैं। पिता सुनील कुमार सिंह करीब तीन दशक से बस कंडक्टर का काम कर रहे हैं।   वह बताते हैं कि हम दो भाई हैं। बड़े भईया 2018 में सीआरपीएफ में जॉब पाने में कामयाब रहे उसके बाद ही हमारे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होना शुरू हुए। 2018 तक हम लोग झोपड़ी के घर में रहा करते थे। भईया के जॉब के बाद ही पक्के का घर बना। पापा अपने पूरी कमाई हम दोनों...

कौन हैं 'भाबी जी घर पर हैं' के Deepesh Bhan उर्फ मलखान? | निधन,जीवनी, संघर्ष, सफलता, प्रेमिका, शादी और अधिक

                                   सार   दीपेश भान (1981-2022) एक भारतीय टेलीविजन अभिनेता थे, जिन्हें लोकप्रिय हिंदी टीवी धारावाहिक 'भाबी जी घर पर है!' (2015) में मलखान की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता था। विस्तार   Deepesh Bhan No more: छोटे पर्दे के मशहूर एक्टर दीपेश भान (Deepesh Bhan) का निधन हो गया है। अचानक से हुए दीपेश भान के देहांत से हर कोई हौरान है। ख़बर पर एंटरटेनमेंट जगत से लेकर उन्हें जानने वाले बहुत से लोग यकीन नहीं कर पा रहे हैं। अभिनेता दीपेश भान 41 साल के थे। 'भाबी जी घर पर हैं' में दर्शकों को उनका मलखान का किरदार को बहुत पसंद आता था। उनकी कॉमेडी सबको हँसने पर मजबूर कर देती थी। शो में अंगूरी भाबी का किरदार निभा रहीं शुभांगी अत्रे ने ई टाइम्स के बात करते हुए कहा कि दीपेश भान की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है. उन्होंने बताया, ''दीपेश भान सुबह एकमद ठीक थे। मैं उनकी बिल्डिंग में ही रहती हूं. आज सुबह वह अपने दोस्तों के साथ अच्छे भले क्रिकेट खेल रहे थे कि तभी अचानक वह जमीन...