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गुदड़ी के लाल ने किया कमाल:पिता नहीं हैं,दीदी और जीजा ने की मदद, फिर धनंजय कुमार, दूसरे प्रयास में बने दरोगा


गुदड़ी के लाल ने किया कमाल:पिता नहीं हैं,दीदी और जीजा ने की मदद, फिर धनंजय कुमार, दूसरे प्रयास में बने दरोगा

 समस्तीपुर (शाहपुर पटोरी): कुछ कर गुजरने की जज़्बा हो तो मुश्किल काम भी आसान हो जाता है ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है समस्तीपुर जिला अंतर्गत शाहपुर पटोरी प्रखंड के रूपौली पंचायत के धनंजय कुमार ने।

 धनंजय कुमार से उसके पिता का साथ बचपन में ही जब वह तीसरे क्लास में था तभी छूट गया था। उसके बाद की पढ़ाई उसने अपने दीदी और जीजा के साथ रहकर किया। धनंजय कुमार के घर में उसके अलावा उसकी एक काफी बुजुर्ग मां है। मां की उम्र अभी तकरीबन 70 साल के आस पास है जो इस उम्र में भी अपने बेटे के लिए चूल्हे और जलवान पर खाना बनाकर देती है, बर्तन साफ करती हैं। 

 धनंजय  कुमार ने बिहार दरोगा भर्ती परीक्षा में सफल होकर ना सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव व समाज का नाम रोशन किया है। 

 धनंजय कुमार अपने माता पिता 7 संतानों में सबसे छोटे हैं। वो अपने 5 बहन और दो भाई में सबसे छोटा है। उसके बड़े भईया का 2013 में एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

    जिसके बाद उसके ऊपर और भी दुखों का पहाड़ सा टूट गया था। लेकिन उसके  दीदी जिनका नाम सीता और जीजा राहुल जो कि एक शिक्षक हैं धनंजय लिए बड़ा भाई और पिता का फ़र्ज़ निभाया और उसे यहां तक पहुंचाने में हर संभव मदद की।

मेरिट लिस्ट का प्रकाशन होते ही पूरे परिवार एवं आसपास के इलाकों में हर्ष का माहौल है। बताते चलें कि बहुत ही साधारण परिवेश में पढ़े लिखे अपने प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही मध्य विद्यालय से हासिल किया। मैट्रिक और इंटर अपने गांव से ही पास किया। स्नातक की परीक्षा A.N.D. महाविद्यालय शाहपुर पटोरी,समस्तीपुर से इकोनॉमिक्स में उत्तीर्ण हुए। इसके बाद यहीं दारोगा बनने के लिए शाहपुर पटोरी में रहकर ग्रुप स्टडी, स्टूडेंट क्लब और वेलफेयर क्लब जाकर तैयारी की। यह सफ़लता इन्हें अपनी दूसरे प्रयास में प्राप्त किया। पहले प्रयास में फिजिकल में सिलेक्ट नहीं हो पाए थे।

 धनंजय कुमार ने बताया कि लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एकाग्र चित्त होकर कठिन परिश्रम की बदौलत किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। हम यहीं नहीं रुकने वाले हैं बल्की बीपीएससी तक जाएंगे। इसके लिए गरीबी और संसाधन की कमी कोई मायने नहीं रखता उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दीदी और जीजा को दिया है जीजा राहुल को धनंजय पर काफी गर्व है।

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