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भारत में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति का फंडिंग कौन कर रहा है?

भारत में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति का फंडिंग: जब रुपयों की कमी छात्र को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने से रोकती है, तब स्कॉलरशिप एक जरिया बनता अच्छे स्टूडेंट्स के लिए जो जीवनदान साबित होती है। आईए जानते हैं कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए कौन फंडिंग करता है।
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भारत में अल्पसंख्यक छात्रवृत्तियों की फंडिंग करने वाले मुख्य संगठनों में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (MOMA) मौलाना आज़ाद एजुकेशनल फाउंडेशन,भारत सरकार (MAEF), अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग (पश्चिम बंगाल सरकार) और अन्य शामिल हैं। 

मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स (MOMA): यह छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित छात्रों के लिए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है; जो अल्पसंख्यकों के लिए एक मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति है। जो अल्पसंख्यक समुदाय के लिए मैट्रिक से पहले और मैट्रिक के बाद भी यह छात्रवृत्ति योजना वित्तीय जरूरत वाले लोगों की सहायता देती है।
 किसके द्वारा: मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स (MOMA)
योग्यता: कक्षा एक से पीएचडी डिग्री तक के अल्पसंख्यक छात्र
क्षेत्र :                भारत
ईनाम की राशि: ₹20,000 
                 
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मौलाना आजाद स्कॉलरशिप: यह स्कॉलरशिप सेंट्रल गवर्नमेंट के तरफ से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को दी जाती है। इस स्कॉलरशिप में कौन सी चीजें हैं, क्या महत्वपूर्ण है आइए जानते हैं। इस स्कॉलरशिप में सलाना ₹5,000 रुपया दिया जाता है। कौन आवदेन कर सकते हैं - माइनॉरिटी समुदाय  यानि हिन्दू धर्म अलावा सभी धर्म के छात्र जो इंडिया के हैं। वो कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक सभी स्टुडेंट एलिजिबल हैं।  इस स्कॉलरशिप के तहत अधिकतम ₹35,000 रूपये दिए जाते हैं।

अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग: यह मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के तरफ से चलाया जाता है। पश्चिम बंगाल सरकार अल्पसंख्यकों के शैक्षिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम को शुरू किया है। पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की संख्या टोटल आबादी का 25% है।

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