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चाईल्ड फ़ोन एडिक्शन को जड़ से खत्म करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

 मोबाईल एडिक्शन किसे कहते हैं?  अगर आपका बच्चा 18 साल से कम उम्र का है और एक दिन में 3 घण्टे से ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता है , और उससे वो कोई प्रोडक्टिव काम नहीं कर रहा है तो वो मोबाईल एडिक्ट हैं। 
पिछले साल यानि साल 2021 के अनुसार भारत में हर ढाई में से एक बच्चा रोजाना मोबाईल फोन पर 3 से ज्यादा घंटा समय बीतता है। यानी वो मोबाईल एडिक्शन का शिकार है।

अगर आपके घर में कोई ऐसा बच्चा है जो मोबाईल एडिक्शन के शिकार हैं तो इस ख़बर को अन्त तक पढ़े। आज हम आपको 4 ऐसे बेजोड़ टिप्स  बताने जा रहे हैं जिसे फॉलो करने पर आपके बच्चे कुछ ही हप्तों के अंदर आपके बच्चे मोबाईल एडिक्शन से बाहर निकल आएंगे। आपका बच्चा ख़ुद पर ख़ुद मोबाईल से दूर होने लगेगा। 

फिजिकल एक्टिविटी का माहौल तैयार करें (पहला टिप्स):

अगर बच्चा बाहर उत्सुकता नहीं पा रहा है तो वो काल्पनिक दुनिया में ही घूमेगा यानि बंदूके चलाएगा, गेम खेलेगा, गाड़ी चलाएगा। बच्चों के अन्दर  एनर्जी लेवल बहुत होती है। उस एनर्जी को उसे कहीं न कहीं खर्च करना है । या तो आप उन्हें आउटडोर गेम्स खेलने दें, दोस्त यार के साथ गार्डन में घुमने दें नहीं तो वो वर्चुअल दुनिया में खेलेंगे।
अगर वो बाहर खेलते हैं तो बस आपको इतना ख्याल रखना है कि वो गलत संगत में न जाए।

क्लोज टू नेचर (दुसरा टिप्स) :

 अगर आपका कोई गांव है या फार्म है तो बच्चों को वहां लेकर जाइए केवल शहरी ज़िंदगी में ही नहीं ढालिए। उनको बाहर घुमाइए, जंगल सफारी कराइए, हिल स्टेशन ले जाइए बच्चों को जितना ज्यादा नेचर के करीब रखियेगा बच्चा उतना ज्यादा वर्चुअल दुनिया यानि मोबाईल एडिक्शन से दूर रहेंगे। क्योंकि नेचर में बहुत डायवर्सिटी है। जो बच्चों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है।

बच्चों को पालतू जानवर के नज़दीक रखें ( तीसरा टिप्स): 

पालतू जानवर का ये मतलब नहीं कि आप उन्हें कुता लाकर दे बल्कि आप उन्हें मछली , तोता और दूसरा कोई पेट लाकर दें । इससे उनका दिमाग उनके ओर आकर्षित होगा।

अच्छी किताबें लाकर दें (चौथा टिप्स) :

अच्छी किताबें का मतलब ये नहीं कि आप एनसीईआरटी की किताबें ला दीजिए , मैथ्स की कोई किताब ला दीजिए कि लो बच्चों इसे पढ़ो। अच्छी किताबें मतलब जो अच्छे लाइफ मैसेज दे, किसमें अच्छी कहानियां हो।  जिसमें बच्चे नए नए चीजें जान सके। जीवन के तौर तरीके सिखाने वाले किताबें लाकर दीजिए। जिससे बच्चे का मन लगा रहे। उनके रूचि को डाइवर्ट कीजिए उनके रूचि को खत्म नहीं कीजिए।
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